केंद्र सरकार आज यानी 2 अप्रैल 2025 को वक्फ संशोधन विधेयक को लोकसभा में पेश करेगी। इस विधेयक को लेकर एनडीए में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अलावा चार बड़े दलों तेलुगु देशम पार्टी (TDP), जनता दल-यूनाइटेड (जेडीयू), शिवसेना और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर सरकार के रुख का समर्थन करने का निर्देश दिया है। वहीं, इस पर जमीयत उलेमा-ए- हिंद उत्तर प्रदेश के कानूनी सलाहकार मौलाना काब रशीदी ने एक बड़ी चेतावनी दी है।
मौलाना काब रशीदी की चेतावनी
मौलाना काब रशीदी ने कहा, "भारत का मुसलमान एक मत है कि यह विधेयक उनके खिलाफ है, और टीडीपी, एलजेपी, जेडीयू जैसी पार्टियां जिनको मुसलमानों के वोटों से जीत मिली, वे कह रही हैं कि यह बिल मुस्लिमों के पक्ष में है।" उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर ये पार्टियां वक्फ बिल का समर्थन करती हैं, तो मुसलमान यह तय करेगा कि उनके साथ क्या करना है।"
मौलाना ने आगे कहा, "यह लोकतांत्रिक देश है। अगर आप हमारे अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकते हैं, तो हमारे पास विकल्प मौजूद हैं। मैं ऐसे नेताओं को चुन सकता हूं, जो मेरे संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करें। जमीयत उलेमा-ए- हिंद इन पार्टियों का बायकॉट कराएगा। भारत का मुसलमान इतना बेवकूफ तो नहीं है कि वह आपकी टोपी में अपने धर्म को बेच देगा तो हम ऐसे दलों का सड़क पर विरोध करेंगे।"
एआईएमपीएलबी की अपील
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने बीजेपी के सहयोगी दलों समेत सभी धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों और सांसदों से अपील की है कि वे वक्फ विधेयक का कड़ा विरोध करें और किसी भी हालत में इसके पक्ष में मतदान न करें। एआईएमपीएलबी के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि यह विधेयक न केवल भेदभाव और अन्याय पर आधारित है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 के तहत मौलिक अधिकारों के प्रावधानों के खिलाफ भी है।